
हमारा शरीर एक वाहन है और आत्मा उसका चालक। जब हम कहते हैं कि शरीर से आत्मा का मिलन है, तो इसका अर्थ केवल भौतिक उपस्थिति से नहीं, बल्कि जीवन की गहराइयों को समझने से है।
हर इंसान के भीतर एक आत्मा है – शांत, शुद्ध और चेतन। जैसे हम बाहरी दुनिया में उलझते जाते हैं, हम इस आत्मा से दूर होते जाते हैं जब हम अपने भीतर झांकते हैं, ध्यान करते हैं, तभी आत्मा का शरीर से सच्चा मिलन होता है।
यह मिलन कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है। यह एक यात्रा है – खुद को जानने की अपने अस्तित्व को समझने की। Tabhi जीवन में संतुलन आता है। तब हमारा सोच, कर्म और भाव – सब कुछ सकारात्मक और शांतिपूर्ण हो जाता है।
आधुनिक जीवन की भागदौड़ में यह मिलन थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन असंभव नहीं। रोज़ थोड़ी देर अपने साथ बिताइए – बिना मोबाइल, बिना शोर के। खुद से कुछ सवाल कीजिए – मैं कौन हूँ? मैं क्या चाहता हूँ? और यही से आत्मा की आवाज़ सुनाई देगी।
यही जुड़ाव हमें अंदर से पूर्ण बनाता है।
यह मिलन ही असली शांति है।